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लक्ष्मी जी की कथा | Laxmi Ji Ki Katha | Lakshmi Katha | Laxmi Song | Laxmi Bhajan
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Credits:
Singer : Mamta Raut
Lyrics : Devendra Rana
Music : Kashyap Vora
Music Label: Wings Music
© & ℗ Wings Entertainment Ltd.
Lyrics:
हम कमल वासिनी माँ लक्ष्मी की
गाथा गाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
जिसको सुनकर धन वैभव यश
घर में आते हैं
हम कथा सुनाते हैं
हम कमल वासिनी माँ लक्ष्मी की
गाथा गाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
माँ दे के हमें वरदान
माँ करो सदा कल्याण
एक नगर में बड़े सेठ का
चलता था व्यापार
घर में कोई कमी नहीं थी
धन का था भंडार
नौकर चाकर गाड़ी बंगले
सब था उसके पास
सारे नगर में कोई नहीं था
उसके जैसा खास
प्यारा सा परिवार था उसका
जिसमें थी एक माता
दो बच्चों और पत्नी के संग
अपना समय बिताता
सदा महकता रहता उसका
खुशियों से घर आंगन
हंसते गाते बीत रहा था
बड़े चैन से जीवन
किस्मत वाले ही दुनिया में
सब सुख पाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
जिसको सुनकर धन वैभव यश
घर में आते हैं
माँ दे के हमें वरदान
माँ करो सदा कल्याण
धन वैभव सुख इतना पाया
होने लगा अभिमान
दीन हीन पर क्रोध दिखाते
करने लगे अपमान
दान पुण्य की बात जहां हो
वहां नहीं वो जाते
मेरी मेहनत का ये फल है
गर्व से सबको बताते
जोड़ जोड़ कर अपना पैसा
मैं व्यापार बढ़ाऊं
ईश्वर ने जब दिया है हमको
क्यों मैं उसे लुटाऊं
भूखा प्यासा दर पर आता
पानी नहीं पिलाते
निर्धन और लाचारों के वो
काम कभी न आते
धन दौलत के नशे में सौ सौ
बात सुनाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
जिसको सुनकर धन वैभव यश
घर में आते हैं
माँ दे के हमें वरदान
माँ करो सदा कल्याण
सेठ की माता ने जब देखा
बेटे को समझाया
छोटा सा ये जीवन बेटा
आनी जानी है माया
निर्धन में नारायण बसते
क्यों उनको ठुकराया
जीना उसका जीना है जो
काम किसी के आया
आज कृपा है लक्ष्मी माँ की
सदा नहीं जो रहती
आज यहां कल और कहीं हैं
ज्यों गंगा जी बहती
लक्ष्मी जी के संग संग तुम
पुण्य के मोती जोड़ो
लाचारों की सेवा से तुम
अपना मुख ना मोड़ो
अभिमानी को ज्ञान वचन ना
कभी सुहाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
जिसको सुनकर धन वैभव यश
घर में आते हैं
माँ दे के हमें वरदान
माँ करो सदा कल्याण
माँ लक्ष्मी ने धीरे धीरे
अपना खेल दिखाया
सेठ के घर से जाने लगी
सारी संचित माया
हर व्यापार मे होने लगी
बहुत ही भारी हानी
कदम कदम पर लगीं सताने
लाखों ही परेशानी
यश वैभव सब धूल होगया
पास नहीं था पैसा
जिस निर्धन से घृणा वो करता
हो गया उनके जैसा
माँ की बात नहीं थी मानी
सेठ बहुत पछताया
निर्धन होकर ही निर्धन के
दुख समझ वो पाया
पछताते हैं लोग तभी जब
ठोकर खाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
जिसको सुनकर धन वैभव यश
घर में आते हैं
माँ दे के हमें वरदान
माँ करो सदा कल्याण
अपनी भूल पर पछताये वो
बदल गया व्यवहार
आते जाते दीन हीन से
करने लगा वो प्यार
रूखा सूखा खाते समय
कोई अगर आ जाता
अपना खाना उसको देके
खुद भूखा रह जाता
व्याकुल होकर एक रोज वो
गंगा तट पर आया
एक छोटी सी कन्या को
वहां पे रोता पाया
बड़े प्रेम से पास में जाकर
सिर पर हाथ फिराया
किसी तरह से रूखा सूखा
भोजन उसे कराया
दान पुण्य के काम सभी के
भाग्य जगाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
जिसको सुनकर धन वैभव यश
घर में आते हैं
माँ दे के हमें वरदान
माँ करो सदा कल्याण
गंगा तट पर बैठी कन्या
मंद मंद मुस्कायी
मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी
मन की बात बतायी
भूखे प्यासे हम खुद रहते
घोर गरीबी छायी
सेठ ने अपनी सारी हालत
कन्या को समझायी
दो बच्चे हैं पहले से ही
तुम्हें नहीं रख पाऊं
मेरे कारण दुखी रही तो
पापी मैं कहलाऊं
हाथ छुड़ाकर भारी मन से
वापस घर को आया
अपनी माँ को रो रो कर वो
सारा हाल सुनाया
माँ और बेटे दोनो मिलकर
नीर बहाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
जिसको सुनकर धन वैभव यश
घर में आते हैं
माँ दे के हमें वरदान
माँ करो सदा कल्याण
पोंछ के आंसू बेटे के
प्रेम से माँ समझाती
दुनियां में हर एक बेटी
अपने भाग्य का खाती
मैं खुद जाके उस कन्या को
अपने साथ में लाऊंगी
अपने इस परिवार का हिस्सा
उस कन्या को बनाऊंगी
गंगा तट पर जाकर माता
कन्या को ले आयी
सारे ही परिवार में जैसे
खुशहाली थी छायी
उस कन्या के कदम पड़े तो
घर में रौनक जागे
निर्धनता दुर्भाग्य निकल के
घर से बाहर भागे
यश वैभव सम्मान सेठ को
फिर मिल जाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
जिसको सुनकर धन वैभव यश
घर में आते हैं
माँ दे के हमें वरदान
माँ करो सदा कल्याण
बूढ़ी माता समझ गयी है
लक्ष्मी माँ का स्वरूप
लक्ष्मी माता घर में आयी
धर कन्या का रूप
माँ ने ऐसी कृपा करी है
हुआ अंधेरा दूर
घर आंगन फिर हो गया
अन्न धन से भरपूर
लक्ष्मी माँ ने बड़े प्रेम से
दिया है जग को ज्ञान
धन दौलत पे कभी न करना
दुनिया में अभिमान
अपने मन में सदा ही रखना
दया धर्म और दान
तभी करुंगी इस दुनिया में
राह तेरी आसान
माता के उपकार सभी को
पार लगाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
जिसको सुनकर धन वैभव यश
घर में आते हैं
माँ दे के हमें वरदान
माँ करो सदा कल्याण
माँ लक्ष्मी के चरण पड़ें तो
आंगन हो सुखदायी
अष्टस्वरूपा महालक्ष्मी माँ
होती सदा सहायी
निर्धन को धनवान बनाती
निर्बल को बलवान
हर हारे को जीत दिलाती
हीनों को सम्मान
मिलकर सब ने करी है विनती
सुनो हे लक्ष्मी माता
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